
शिखंडी का शिंदे पर व्यंग्य वाण
कुणाल कामरा नामका तथाकथित हास्य कलाकार ने ऐसी कॉमेडी की कि राजनीतिक माहौल गर्म हो गया. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित देश के कई नेताओं पर अभद्र टिपण्णी कर वे टीआर पी ले उड़े.शिवसेना भड़क गयी. उसने हैबिटेट स्टुडिओं में तोड़ फोड़ करदी। सरकार ने कार्रवाई की और कई लोगों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया. इस से यह हुआ कि अभिव्यक्ति को स्वतंत्रता मिल गयी. सरकार ने संविधान का पालन भी कर लिया. अब बखेड़ा यहीं ख़त्म होता तो ठीक. मौका देखकर चौका मारना जारी है. महायुति सरकार को बहुमत है तो क्या हुआ ,व्यक्ति स्वातंत्र्य भी कोई चीज है. हम कटाक्ष ,टिंगल , फिरकी लेंगें. कुछ लोग कह रहे हैं जो प्रभावशाली होते हैं उनकी ही खिंचाई होती है. उस प्रभावशाली व्यक्ति को व्यंग्य व कटाक्ष सहने की आदत डालनी चाहिए.लेकिन कहा गया हैअति सर्वत्र वर्जयेत। लेकिन शिंदे साहब को सलाह दी जा रही है की हँसिये, आनंद लीजिये. अपनी गद्दारी पर हँसिये और खुद्दारी पर भी हँसिये.वैसे चुनाव में जनता ने गद्दार कहने वाली इंडी गठबंधन की चुनाव में हवा निकाल दी है. फिर भी लगे हैं गद्दार,खोखा,मिंधे आदि उपमाओं को निकालने में. पर अपने गिरेबान में न झांकने वाले यह समझें कि जो गद्दारी हुई उसे जनता का प्यार मिला है,भरपूर जनादेश मिला है,क्योंकि यह गद्दारी नहीं विद्रोह था जो जन कल्याण के लिए किया गया था. इसलिए शिंदे पर गढ़ा गया व्यंग्य यह सिद्ध करता है कि शिंदे का विद्रोह राजनीतिज्ञों के अलावा रचनकारों के भावों को अन्तःकरण तक भेद गया है कि रिक्शावाले,दाढ़ीवाले पर काव्य फूटने लगे हैं.
यहाँ यह समझना होगा कि विद्रोह तो अजित पवार ने भी किया है, उनका विद्रोह तो अपने चाचा के खिलाफ हुआ.पर कविता या हास्य या कटाक्ष या टिंगल उन पर नहीं हुआ.क्यों?कुणाल के हताश हास्य की टाइमिंग देखिए ,उसने अपनी कॉमेडी जनवरी या फ़रवरी में रेकार्ड किया था. लेकिन उसे प्रसारित मार्च में किया गया जब विधानसभा का सत्र चल रहा है. नागपुर में दंगा हुआ है.और महायुति के प्रचंड जनादेश के आगे सदन में विपक्ष की दाल नहीं गल रही है। तो इंडी गठबंधन के सपोले बिलबिलाने लगे और शिंदे को टारगेट किया.
शिंदे का उड़ाया गया उपहास उन्हें और ऊंचाई दे गया.यह भी समझिये कि व्यंग्य,कटाक्ष या आलोचना उन्हीं की होती है जो ताकतवर होते हैं. अगर किसी ने यह कृत्य सुपारी लेकर किया है तो यह सुपारी देने वाले को और भी महंगा पड़ेगा. यह कालांतर में एकनाथ को बज्र नाथ बना देगा. जो शिंदे विरोधी कुणाल काण्ड पर मजा ले रहे हैं,वह यह समझ लें कि गद्दार- गद्दार चिल्लाने वाले को जनता ने कहीं का नहीं छोड़ा है. पूरा इंडी गठबंधन हार की टोकरी में जा गिरा है. कांग्रेस ,उद्धव सेना टूलकीटियों की चांडाल चौकड़ी बन कर रह गयी है.केंद्र में मोदी और राज्य में महायुति सरकार के बनने से विरोधी हताश हो चुके हैं। उनके सारे हथकंडे फेल हो गए हैं. तो यही शिखंडी बचा था जिनका उपयोग कर कुछ हासिल करने में लगे हैं. यह वार भी खाली चला गया.श्री शिंदे को भी चाहिए कि भौकने वाले कुत्तों को उनकी हाल पर छोड़ देना चाहिए
कुणाल ने कॉमेडी के जरिये जो राजनीतिक प्रोपेगेंडा किया है उससे उसका एजेंडा सामने आ गया है. उसने अनजाने में ही स्टैंड अप कॉमेडी को नुकसान पहुंचा दिया है. उसने कॉमेडी की मंच को बदनाम कर दिया. जहाँ उसने शिंदे के खिलाफ कॉमेडी प्रोग्राम रेकार्ड किया था वह हुल्लड़बाजों की भेंट चढ़ गया.कुणाल ने अपने कृत्यों हास्य के मंच में लंका लगा दी..