Home विविधासाहित्य ●खरी-खरी….☆ अशोक वशिष्ठ

●खरी-खरी….☆ अशोक वशिष्ठ

by zadmin
vashishth

●खरी-खरी
लहर तीसरी का शुरू ,  होने लग गया शोर।

सोच-सोचकर डर रहा , है पागल मन मोर।।

है पागल मन मोर , तीसरी लहर आयेगी।

ना जाने कितनों की, फिर से जान जायेगी।।

चौकन्ने सब रहें , मचे नहीं अफरा-तफरी। 

करें प्रतिज्ञा सभी , न आये लहर तीसरी ।।
☆ अशोक वशिष्ठ 

You may also like

Leave a Comment